मौसम था मस्ताना,
सब कुछ अच्छा लग रहा था,
आज मैं मिलूँगा उनसे,
यह सोच कर ही मन खुश हो रहा था।
12बजे की मुलाक़ात थी,
बज गए थे चार,
12कप चाय पी ली थी मैंने,
पर न आया मेरा यार।
था मैं निराश और हताश,
था गुस्सा उन से,
तय किया इस बार मैं रुठुन्गा,
और बात न करूँगा उनसे।
हवा ने बड़े अदा से मुझसे कहा,
बात कर ले अपनी प्रेमी से,
वरना तू पछतायेगा,
और बात न करके उनसे,
तू अपने को ही तड्पाएगा।
बात मैं कर लेता पर,
मेरा अहम् मेरे प्यार से टकरा गया,
सोचा जब उन्हें नही परवाह हमारी,
तो हम भी परवाह नही करते,
याद आयेगी तो वो बात करेंगे,
हम इस बार पहल नही करते।
वो रात थी बेचैनी की,
तड़प की, इंतज़ार की,
इंतज़ार उनके फ़ोन का,
तड़प उनसे बातें करने की,
पर मैं भी था जिद्दी,
उस रात न की उनसे बात,
नींद तो न आई हमे,
पर जैसे-तैसे कट गई रात।
सुबह हुई, हुई दोपहर,
शाम को हारकर हमने ही किया फ़ोन,
उठाया उन्होंने और कहा,
"सॉरी, आई वांट यू नो मोर। "
टूट गया मेरा दिल,
रोया था फुट फूटकर उस दिन अकेले में,
नफरत हो गई मुझे प्यार से,
अब तनहा जीने लगा मैं।
पर तनहा रहने का भूत रहा सिर्फ़ दो दिन,
तीसरे दिन मिल गया मुझे मेरा नया यार,
बातें हुई, बातें बढ़ी,
और मुझे फ़िर से हो गया प्यार।
आज फ़िर 12 बजे की थी मुलाक़ात,
बज गए हैं चार,
डरा हुआ हूँ मैं,
क्योंकि अभी तक नही आया मेरा यार।
Friday, August 29, 2008
बचपन

कल रात देखा तारों को,
टिमटिमाते झिलमिलाते सितारों को,
चाँद अपनी चांदनी बिखेर रहा था,
मुझे फिर बचपन मे धकेल रहा था।
बचपन,
जब मैं भी इनकी तरह आजाद था,
जब कोई बोझ मेरे कंधो पर न था,
आजाद था मैं माँ-बाप की आशाओं से,
आजाद था मैं कुछ करके दिखने के दबाव से,
दूर था इस छल भरी कपटी दुनिया से,
खुश था अपनी छोटी-सी निश्छल दुनिया में।
दुनिया,
जहाँ बैट था ,थी बॉल और चाकलेट ,
कॉमिक्स और गेमिंग थी,
और थे मेरी तरह दुसरे नन्हे साथी।
दिन-भर खेलते,उछलते-कूदते,
रात को फिर मिलते चंदा मामा से,
बातें करते तारों से,
और फिर जी-भर सोते।
मस्त दुनिया थी वो,
पर अब कही खो गई वो,
खो गया मेरा वो जहाँ,
जिसे आज भी मैं धुन्ड़ता हूँ इन तारों में,
चमकते चाँद और झिलमिलाते सितारों में।
Wednesday, August 6, 2008
जिंदगी...मेरी नज़र में
जिंदगी एक राह है,
जिसे हमें ख़ुद बनाना है।
खुशी के फूलो को ख़ुद उगाना है,
गम के कांटो को ख़ुद हटाना है,
साथियों के साथ इस राह में आगे बढ़ते जाना है।
लड़ना है अपने खोफो से,
उन पर विजय पताका फहराना है,
अच्छाई के उजालो से उसको रोशन करना है,
बुराई के अंधकार का नामोनिशान मिटाना है।
जिंदगी एक राह है, जिसे हमें ख़ुद बनाना है.
जिसे हमें ख़ुद बनाना है।
खुशी के फूलो को ख़ुद उगाना है,
गम के कांटो को ख़ुद हटाना है,
साथियों के साथ इस राह में आगे बढ़ते जाना है।
लड़ना है अपने खोफो से,
उन पर विजय पताका फहराना है,
अच्छाई के उजालो से उसको रोशन करना है,
बुराई के अंधकार का नामोनिशान मिटाना है।
जिंदगी एक राह है, जिसे हमें ख़ुद बनाना है.
Tuesday, August 5, 2008
तूने मोहब्बत ...... क्यो दी?
या खुदा,
क्यो तूने मोहब्बत ही जीने की वजह दी,
और अगर उसे जीने की वजह बना ही दिया था,
तो क्यो नही उस पर अपनी निगाहें करम की?
क्यो नही बख्शा मोहब्बत करने वालो को,
क्यो हरदम हर पल, हर बार, उन्हें तूने जुदाई की सजा दी,
क्यो बिछा दिए अंगारे उनकी राह में,
क्यो न उसकी जगह गुलो की चादर दी?
अगर नफरत थी इतनी मोहब्बत से,
तो क्यो तूने मोहब्बत ही जीने की वजह दी?
क्यो तूने मोहब्बत ही जीने की वजह दी,
और अगर उसे जीने की वजह बना ही दिया था,
तो क्यो नही उस पर अपनी निगाहें करम की?
क्यो नही बख्शा मोहब्बत करने वालो को,
क्यो हरदम हर पल, हर बार, उन्हें तूने जुदाई की सजा दी,
क्यो बिछा दिए अंगारे उनकी राह में,
क्यो न उसकी जगह गुलो की चादर दी?
अगर नफरत थी इतनी मोहब्बत से,
तो क्यो तूने मोहब्बत ही जीने की वजह दी?
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