चल पड़ा हूँ डगर मोहब्बत की पे ,
जल रहा हूँ आशिकी में,
पुरे दिलो जान से की है मोहब्बत,
यह बता न सका उन्हें मैं।
मेरी मोहब्बत की गाड़ी ने रफ्तार तो पकड़ी थी,
पर अपने मुकाम उनके दिल तक न पहुँच सकी,
कोशिश तो कोशिश से भी ज्यादा की,
पर इज़हार-ऐ-मोहब्बत न हो सकी,
पर इज़हार -ऐ-मोहब्बत न हो सकी।

