उनसे मोहब्बत करने की कीमत मैंने अदा कर दी,
मांगी जब उनने हमसे अपनी मोहब्बत की कुर्बानी,
हमने कुर्बानी-ऐ-मोहब्बत उन्हें नज़र कर दी।
पर हमने उन्हें बताया कि हमने हमेशा यही चाह है कि
वो जिसे चाहे उसके साथ ज़िन्दगी बसर करे,
तो वो जाना चाहती है तो चले जाए हमारी ज़िन्दगी से,
पर हमे उन्हें भूलने के लिए मजबूर न करे,
जीने दे हमे अपनी मोहब्बत के साथ,
वो अपनी मोहब्बत के साथ ज़िन्दगी बसर करे।
ख़बर मिली जब इसकी हमारे दोस्तों,हमारे फिक्र्मंदो को,
आए वो हमारे पास हमारा दुःख बाटने,हमे समझाने को,
पहाड़ के सामने आ जाने से,
नदी ज्यादा देर नही ठहरती,
बल्कि करके सुराख़ पहाड़ में,
वो वहां से है आगे बह निकलती।
तो अब मुझे भी आगे बढ़ जाना चाहिए,
और समझ के उन्हें बुरा सपना,
हमे उन्हें भूल जाना चाहिए।
बताया उन्हें हमने,
कि जिसे वो बुरा सपना कह रहे है,
वो हमारी ज़िन्दगी है,
तो भला ज़िन्दगी से आगे कैसे बढ़ जाए,
और जहाँ तक बात है दुःख कि,
तो हमे कोई गम नही है,
वो हमारे साथ नही तो क्या,
हम उनकेसाथ रहेंगे,
इस दुनिया में यह मुमकिन नही तो क्या,
हम सपनो कि दुनिया में उनके साथ जिंदगी बसर करेंगे।
बस इतनी बात थी कि,
कोई मुझे दीवाना कहता, कोई कहता पागल,
कोई मजनू कह कर पुकारता,
पर फर्क न पड़ता कोई मुझको,
क्योंकि मुझे पता था कि,
इन नासमझो कि छोटी समझ से,मेरी मोहब्बत बहुत बड़ी है,
इन लोगो कि छोटी दुनिया से,मेरी सपनो कि दुनिया बहुत बड़ी है।
कोई कहता था दीवाना,कोइपागल कहता था,
कोई लैला का मजनू कह कर चिडाता,
पर फर्क न पड़ता कोई मुझको,
क्योंकि मैं सपनो कि दुनिया में रहता था।
पर जब मौत आई,
तो सवाल उठा मेरे मन में,
क्या मैंने अपनी मोहब्बत निभाई है,
क्या मैंने साबित कियाकि,
लोगो की समझ छोटी,मेरी मोहब्बत बड़ी है,
या यह मेरा वहम था कि,
यह दुनिया छोटी,मेरी सपनो कि दुनिया बड़ी है।
पूछा जब यह सवाल मैंने मृतुदूत से,
तो उसके जवाब से मुझे राहत मिली,
वो बोला,
"ऐ खुदा के बन्दे,तू तो वो चिराग है,
जो जलता रहा ज़िन्दगी भर
दुसरे कि ज़िन्दगी रोशन करने के लिए,
तो तू अपनी रौशनी पे शक न कर,
चैन दे अपने मन को,
यकीं कर इस बात का,
कि खुदा और तेरी मोहब्बत में,
खुदा छोटा है,तेरी मोहब्बत बड़ी है,
यकीन कर इस बात का,
कि खुदा की रची यह दुनिया छोटी है,तेरी सपनो कि दुनिया बड़ी है।
और क्या सबूत चाहिए तुझे इस बात का,
कि ख़ुद खुदा भी तेरी मोहब्बत के आगे छोटा पड़ा है,
और ले जाने तुझे अपने साथ,
वो ख़ुद तेरी रजामंदी के लिए,
तेरे आगे झुका खड़ा है,
वो तेरे आगे झुका खड़ा है।"
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4 comments:
kya bhai kaun hai wo ladki?rahti hai wo kaha.
mere dost ne jazba-e-mohabbat
ki taarikh main apna naam kalam kar diya hai...............
mohabbat ki anokhi misaal dekar...
"love" karne waalo ko sharminda kar diya hai...........
par raaz ki ek baat hai....
ishq ki is "thesis" ko "practical"
ke bina poora karna mushkil hi nahi naa-mumkin tha...........
par I AM PROUD TO BE UR FRND....
jisne itni choti si umar mai woh likh diya........
jise samajhne ke liye insaan ta-umr zehan kuredta raha...........
This really a piece of heart touching love extract.
It proves that love is a true feeling,above all the attaintment and losses.
It is immortal and stand above all the happenings of this world.
The poem needs applauses.
good yaar...u have a talent!
i liked ur thoughts.
also keep bringing innovations and varieties in your work, which will be a real delight!
keep it up :)
Harshit
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